कमार जनजाति के समाजिक आर्थिक स्थिति का भौगोलिक अध्ययन

 

कुबेर सिह गुरुपंच1, राजु चन्द्राकर2

1प्राचार्य, देव संस्कृति कॉलेज आफ एजुकेशन एंड टेक्नोलॉजी खपरी दुर्ग, छत्तीसगढ़ भारत

2शोधार्थी भूगोल विभाग, देव संस्कृति विश्वविद्यालय ग्राम साकरा, कुम्हारी जिला दुर्ग, छत्तीसगढ़ भारत।

*Corresponding Author E-mail:

 

ABSTRACT:

भारतीय समाज में विभिन्न प्रकार के जनजाति का होना हमारे संस्कृति का धरोहर हैं। जिसने से कमार जनजाति शासन द्वारा घोषित एक विशेष पिछड़ी जनजाति हैं। इस जनजाति को गोड जनजाति की उपजाति माना जाता है। यह जनजाति जो सदियों से जंगल में रहते रहे हैं। इस जनजाति का आर्थिक सामाजिक विकास नहीं हो पाया है। इसी कारण यह जनजाति में सदियों के बाद भी विकासात्मक परिवर्तन देखने को नहीं मिला है। या जनजाति अत्यंत गरीब पिछड़ी और मुख्यधारा से विमुख हैं। यह जनजाति छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की गरियाबंद छुरा, मैनपुर तथा धमतरी जिले के नगरी तथा मगरलोड विकासखंड में मुख्यता निवास करते हैं यह जनजाति छोटे झोपड़ी काबिले जंगल में निवास करते हैं। यह जनजाति का कोई अपना लिखा हुआ विकास नहीं है। कमार जनजाति सीधा सरल तरीके से जीवनयापन करते हैं ये जनजाति तीर धनुष भाले और शरीर पर वस्त्र धारण करते हैं। जिसे इन जनजाति का अलग पहचान बन जाते हैं। कमार जनजाति के दो उप जाती हैं पहाड़ पत्ती और बंदरजीवा हैं। छत्तीसगढ़ के कमार जनजाति अपनी उत्पत्ति मैनपुर विकासखंड के देव डोगर ग्राम में बताते हैं।

 

KEYWORDS: कमार, जनजाति, भगौलिक अध्ययन।

 

 


प्रस्तावना %&

ष्ष्लोगों को अपनी प्रतिभा के अनुरूप विकसित होने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए और हमें उन पर कोई चीज थोपने से बचना चाहिए। हमें हर तरह से उन्हें प्रोत्साहित करने का प्रयास करना चाहिए ताकि वे अपनी परंपरा गत कलाओं संस्कृति का संवर्धन कर सके।

 

पंडित जवाहरलाल नेहरू

 

कमार जनजाति भारत सरकार के द्वारा घोषित पिछड़ी जाति-जनजाति में से एक हैं। यह जनजाति छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छूरा, मैनपुर तथा धमतरी जिले के नगरी तथा मगरलोड विकासखंड में निवास करते हैं। तथा महासमुंद जिले में यह जनजाति का कुछ समूह परिवार महासमुंद बागबाहरा विकासखंड में पाया जाता है। यह जनजाति अभावग्रस्त दुर्लभ क्षेत्र में होने के कारण अत्यंत पिछड़े हुए हैं। जिसके कारण इसका विकास का स्तर रुक गया है। कमार जनजाति के उत्पत्ति के बारे में पता करने पर यह जनजाति अपनी उत्पत्ति को छत्तीसगढ़ के मैनपुर विकासखंड देवड़ोर ग्राम में बताते हैं। यह जनजाति वामन देव को अपना देवता मानते हैं जो आज भी देव डोंगर की वामन डूंगरी में स्थापित हैं।

 

2011 जनगणना के अनुसार यह जनजाति का जनसंख्या 26530 हैं। जिनमें 13070 पुरुष 13460 स्त्रियां हैं। जनजाति के साक्षरता की दर 2011 जनगणना के अनुसार 47.7 जिनमें महिला साक्षरता 37 तथा पुरुषों का साक्षरता 8.8 है या जनजाति की होली दीवाली में खूब नाच गान करते हैं जिनमें से प्रमुख दीवाली का सुआ नाच होती हैं और विवाह में विवाह में पुरुष महिला दोनों एक साथ नाचते हैं।

 

कमार जनजाति अपना मकान मिट्टी घास भूस से बनाते हैं। तथा इसके मकान पर झोपड़ घास तथा खपरैल के बनाते हैं। यह जनजाति मुख्य रूप से शिकार करते हैं। इस कारण सभी के घरों में तीर धनुष मछली पकड़ने का जाल पाए जाते हैं। यह जनजाति के स्त्रियों का उम्र जब 8 से 10 वर्ष का हो जाते हैं तो गोदना गोदवाना प्रारंभ करते हैं। कमार जनजाति के लोग वस्त्र में पंचा, धोती, लूंगी वह स्त्रियां लुगरा, पोलखर पहनते हैं कमार जनजाति के लोग का मुख्य भोजन चावल, कोदो, पेज, भात, बासी, मूंग, उड़द सब्जी में जंगली भाजी मशरूम खाते हैं

 

कमार जनजाति का मुख्य व्यवसाय सुपा, टूकना, झांपी आदि बांस से बनाकर उसको बेचते हैं। कुछ कमार कोदो, धान, उड़द आदि की खेती करते हैं। और वनों से प्राप्त महुआ तेंदूपत्ता बांस गोद,आंवला आदि को संग्रहण करके बाजार में बेच कर अपने आवश्यकता का सामग्री खरीदते हैं। अन्य जातियों की तरह कमार जनजाति में भी सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जाति पंचायत बैठक होते हैं। सभी कमार जनजाति के लोग उस पंचायत के बैठक के सदस्य होते हैं। जिन्हें वे अपनी समस्या का निपटारा पंचायत बैठक बुलाकर करते हैं। यह जनजाति की विवाह घर के बड़े बूढ़ों के देखरेख में संपन्न होते हैं। कमार जनजाति में विधवा विवाह पुनर विवाह प्रचलित होता है।

 

शोध अध्ययन की समीक्षा

कमार जनजाति पर शोधार्थियों के द्वारा अनेक शोध कार्य किए जा चुके हैं जिनमें विभिन्न प्रकार के जानकारी प्राप्त हुआ है। जिसे सरकारी योजना के द्वारा इस जनजाति को ऊपर उठाने का प्रयास किया जा रहा है।

1. कुमारी भारती 1984 ने कमार पर एक शोध पत्र कमार एक छत्तीसगढ़ी जनजाति प्रकाशित किया जिनमें कमार जनजाति का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक संबंधों को संक्षिप्त रूप में व्यक्त किया।

2. श्रीवास्तव 1990 ने जनगणना रिपोर्ट के आधार पर शोध पत्र सोशियो इकोनामिक एंड डिमोग्राफिक प्रोफाइल ऑफ कमार ट्राइबऑफ एम पी प्रकाशित किया।

3. कुमार जितेंद्र 2013 छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में जनजाति का अध्ययन किया जिसमें बताया कि कमार जनजाति अन्य जनजातियों संस्कृति का प्रभाव पड़ता जा रहा है बाह्य भौतिक अभौतिक संस्कृति में से यह जनजाति समाज प्रभावित हो रहा है जिसे विकास की ओर धीरे-धीरे बढ़ रहा है

4. कुर्रे एवं प्रधान 2014 में गरियाबंद जिले में कमार जनजाति का अध्ययन किया इसके अध्ययन मुख्य उद्देश्य शासकीय योजना पर कमार जनजाति के विकास पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना था जिस ने बताया कि यह जनजाति निम्न शिक्षा जानकारी के अभाव के कारण इसका विकास के स्तर भी निम्न हैं

5. सेठी अर्चना 2017 छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में कमार के आय एवं उपभोग प्रवृत्ति का अध्ययन किया जिस ने बताया कि शैक्षणिक स्तर पर आय का प्रभाव पड़ता है जिसके कारण आज भी कमार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।

 

अध्ययन के उद्देश्य

   कमार जनजाति की समाजिक आर्थिक स्थिति का भौगोलिक अध्ययन

   कमार जनजाति की शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन

   कमार जनजाति का विकास की योजनाओं के प्रभाव का अध्ययन

 

शोध प्रविधि

प्रस्तुत शोध प्रबंध का अध्ययन अल्पसंख्यक कमार जनजाति का है। अध्ययन हेतु 300 घरों का चयन कर प्रत्येक परिवार के मुखिया से साक्षात्कार किया गया है।

 

प्राथमिक तथ्यों का संकलन अनुसूची प्रविधि, निरीक्षण पद्धति, साक्षात्कार, व्यक्तिगत अध्ययन विधियों से किया गया है। इस कार्य हेतु अनुसूचियों तथा मार्गदर्शिका वस्तु स्थिति की वास्तविकता को शोध प्रदर्शन में प्रस्तुत करने हेतु छायांकन लोकगीत तथा अन्य तथ्यों को टेप का प्रयोग किया है।

 

द्वितीयक आंकड़ों का संकलन हेतु प्रकाशित पुस्तकें, पूर्व शोध अध्ययन, पत्र, पत्रिकाएं, शासकीय प्रतिवेदन, विभागों से संरक्षित अभिलेख, व् अन्य माध्यम जैसे समाचार पत्र इंटरनेट टेलीविजन आदि।

 

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अध्ययन क्षेत्र

प्रस्तुत अध्ययन क्षेत्र छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में कमार जनजाति पर किया गया है जो एक पिछड़ी जनजाति हैं यह मुख्यता धमतरी जिले के विकासखंड नगरी, मगरलोड, धमतरी में कमार जनजाति पाया जाता है जिसमें कुल कमार परिवारों की संख्या 1711 है। कमार जनजाति कि जनसंख्या 6459 हैं। जिनमें पुरुष की संख्या 3180 तथा स्त्री की संख्या 3279 हैं। यहां ग्रामों की संख्या 643 हैं। तथा यहां के लिंगानुपात 1031 में। यह जिला 2042 ‘एन अक्षांश और 8133 देशांतर के बीच स्थित है। भौगोलिक क्षेत्रफल 4081.93 किलोमीटर तक हैं।

 

कमार जनजाति के विकास में समस्याएं

  भूमि से अलग होना

  अशिक्षा

  बंधक मजदूर

  बेरोजगारी

  निर्धनता

  ऋणग्रस्तता

  प्राकृतिक आपदाएं

 

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले कमार जनजाति के विकास में कमार कोष्टक का गठन कमार जनजाति के कल्याण उसके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए यह प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। क्योंकि यह जनजाति अन्य जनजाति के अपेक्षा अधिक पिछड़े हुए हैं। कोष्टक का गठन होने के बाद यह जनजाति विभिन्न प्रकार की सुविधा मिल रही हैं। लेकिन यह सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। इसके विकास के लिए रोजगार मूलक और जीवकोेपार्जन से संबंधित कौशल विकास केंद्रित प्रशिक्षण करने की आवश्यकता है। तमाम कोशिशों के बाद भी जनजाति समाज और शिक्षा ऋण ग्रस्सता शोषण तथा निर्धनता जैसी सामाजिक समस्याओं से ग्रसित है। ऐसे में कमार जनजाति की वर्तमान स्थिति एवं समस्याओं का अध्ययन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

 

सुझाव

  योजना के क्रिया वन के साथ-साथ उनका मूल्यांकन कार्य की गुणवत्ता तथा पारदर्शिता पर विशेष ध्यान देना चाहिए

  सामाजिक विकास के लिए विकसित लोगों से संपर्क मेलजोल अवश्य है

  कमार जनजाति में विकास के लिए शासन द्वारा नई नई योजना की शुरुआत किया जाना चाहिए

  जनजातियों की आज भी सबसे बड़ी समस्या आर्थिक पिछड़ापन है। इसका समाधान करने लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने के साथ ही स्वरोजगार की सुविधाओं को बढ़ाना जरूरी हैं।

  सांस्कृतिक समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब बाहरी समूहों को जनजातियों पर अपने धर्म को थोपने के अवसर दिये जायें।

  जनजातियों की सामाजिक समस्याओं के निराकरण के यह जरूरी है कि जनजातीय नेताओं की सहायता से लोगों के विचारों और मनोवृत्तियों में परिवर्तन लाया जाय।

  जनजातियों की शैक्षणिक समस्याओं के निराकरण के लिए जनजातीय क्षेत्रों में व्यावहारिक शिक्षा की बहुत आवश्यकता हैं। यह व्यावहारिक शिक्षा कृषि, दस्तकारी, कृषि उपकरणों के निर्माण तथा हस्तशिल्प से संबंधित होनी चाहिए।

  जनजातियों की स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए आदिवासी क्षेत्रों में सचल चिकित्सालयों की व्यवस्था की जानी चाहिए।

 

संदर्भ ग्रंथ सूची

1.       आहूजा, राम 2003 भारतीय सामजिक व्यवस्था, रावत पब्लिकेशन्स, जयपुर।

2.       इसेटेट, एस.एन. 1964 माॅर्डनाईजेशन एण्ड कंडीश्न आफ सस्टेंड ग्रोथ, वल्र्ड पालिटिक्स।

3.       उपाध्याय, डा. विजय शंकर एवं विजय प्रकाशभारत में जनजातीय संस्कृति’,मध्य प्रदेश ग्रंथ अकादमी, भोपाल।

4.       वैष्णव, डा. टी.के. 2009 ‘छत्तीसगढ़ की अनुसूचित जनजाति महिलाएँ (स्थिति, भूमिका एवं विकास)’, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर।

5.       अंजुवाला 2006 ‘जनजातियों की राजनीतिक संस्कृति, युनिवर्सिटी पब्लिकेषन, नई दिल्ली

6.       कोठारी रजनी 1970 कास्ट इन इंडियन पाॅलिटिक्स, ओरियेंट लो मेन, नई दिल्ली।

7.       श्रीवास्तव 1990 ने जनगणना रिपोर्ट के आधार पर शोध पत्र सोशियो इकोनामिक एंड डिमोग्राफिक प्रोफाइल ऑफ कमार ट्राइबऑफ एम. पी.

8.       कुमार जितेंद्र 2013 छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में जनजाति का अध्ययन।

9.       कुर्रे एवं प्रधान 2014 में गरियाबंद जिले में कमार जनजाति का अध्ययन।

10.    सेठी अर्चना 2017 छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में कमार के आय एवं उपभोग प्रवृत्ति का अध्ययन।

 

 

 

Received on 26.08.2022         Modified on 18.09.2022

Accepted on 24.10.2022          © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2022; 10(3):96-100.